Monday, 20 March 2023

नरसिंह बसत हवय हर खंभा

नरसिंह बसत हवय हर खंभा

हम प्रहलाद बनै नइ पान।

रेंगे बिन अउ दोष लगावन,

काबर मिलय नहीं भगवान।।


बिगन जपे प्रहलाद बरोबर,

कोन बिधि छाहित करवान।

पबरित नाम सुने गाये बिन,

दिव्य दुआरी कइसे जान।।


भजत भजत हरिनाम मुरुख मन,

मइल भरे मन ला फरियान।

निर्मल भाव उवावन घट मा,

जाके बासा अटल थिरान।।


शोभामोहन बेरा बुलकत,

अब तो सुमिरन साध जगान।

लख चौरासी भटकत चोला,

बदलत वो जीव पार लगान।।


शोभामोहन 

०२/०६/२०२१

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