नरसिंह बसत हवय हर खंभा
हम प्रहलाद बनै नइ पान।
रेंगे बिन अउ दोष लगावन,
काबर मिलय नहीं भगवान।।
बिगन जपे प्रहलाद बरोबर,
कोन बिधि छाहित करवान।
पबरित नाम सुने गाये बिन,
दिव्य दुआरी कइसे जान।।
भजत भजत हरिनाम मुरुख मन,
मइल भरे मन ला फरियान।
निर्मल भाव उवावन घट मा,
जाके बासा अटल थिरान।।
शोभामोहन बेरा बुलकत,
अब तो सुमिरन साध जगान।
लख चौरासी भटकत चोला,
बदलत वो जीव पार लगान।।
शोभामोहन
०२/०६/२०२१
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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