मरनी गीत
तान गँवागे सुर छरियागे,
टूटत बदन तमूरा हो ।
साँस थिरागे आस सिरागे,
बेरा बनगे छूरा हो ।।
कोनो कलपत कोनो रोवत,
बेरा भइगे पूरा हो ।
जस कीरत के धज फहरत हे,
सुरता कलश कँगूरा हो ।।
पिया पियारी महल अटारी,
छूटत टूरी टूरा हो।
पाँचो जिनिस अपन कुल मिलगे,
भेजिस खबर हजूरा हो ।।
कोनो हीरा कोनो कंकर,
कोनो कुकरी सूरा हो ।
शोभामोहन मन मन करथे,
जगत जमूगाफूरा हो ।।
शोभामोहन
२०/११/२०२०
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