Thursday, 2 March 2023

शंभु सुमरनी (भुजंगप्रयात वर्णिक छंद)

शंभु सुमरनी (भुजंगप्रयात वर्णिक छंद)

मनावौं सदा हे गुसैया भवानी।
चढ़ा बेलपाना रितो धार पानी।। 

जटाजूटवाला महादेव भोला।
सबो छोड़के तोर ले आस मोला।। 
सबो देवता ले बड़े शंभुदानी।
मनावौं सदा हे गुसैया भवानी।।
चढ़ा बेलपाना रितो धार पानी।

सबो देवता गोड़ में तोर लोटै।
धियाडोंगरीराज  के भाँग घोटै।। 
महाशक्तिसोती सुवारी सयानी।
मनावौं सदा हे  गुसैया भवानी।
चढ़ा बेलपाना रितो धार पानी।। 

खड़े द्वार सेवा करे तोर नंदी।
सबो भूत के नाथ तैं निर्द्वंदी।।
उमा ला बताये महाज्ञानज्ञानी।
मनावौं सदा हे गुसैया भवानी।
चढ़ा बेलपाना रितो धार पानी।। 

पिये बीख प्याला प्रभू तैं निराला।
सजा माथ मा दूज के चन्द्रमा ला।। 
जटा बाँध गंगा धरेध्यान ध्यानी।
मनावौं सदा हे गुसैया भवानी।
चढ़ा बेलपाना रितो धार पानी।। 

नरी नागमाला मणी के उजाला।
मथौंड़ी मँझारी भरे नैन ज्वाला।।
प्रभू विश्व के अर्धनारी विज्ञानी।
मनावौं सदा हे गुसैया भवानी।
चढ़ा बेलपाना रितो धार पानी।। 

स्वयंभू महेशा त्रिपुण्डी बियोगी।
महातंत्र ज्ञानी सदा सिद्ध जोगी।।
सबो भूत के तैं प्रभू लागमानी। 
मनावौं सदा हे गुसैया भवानी।
चढ़ा बेलपाना रितो धार पानी।

तहीं नीलकंठी भभूती रमैया।
महाघोर तांडौं करे तात्थैया।।
हवौं मैं कुजानी हवौं मैं अड़ानी।
मनावौं सदा हे गुसैया भवानी।।
चढ़ा बेलपाना रितो धार पानी।

शोभामोहन श्रीवास्तव
फागुन अंजोरीपाख दूज
२२/०२/२२

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