*प्रभु बाँह धरौ अब पार लगाय(अरविंद सवैया)*
*बनगे हन डूमर के किरवा नइ जानन का जग बाहिर आय ।
अपने तन ले
अपने मन ले अपने जन ले उसुवास न हाय।
नइ बूझन का
दुख कारन हे बिन ज्ञान गुनान पियास जगाय।
भटके हन भाँवर मा
भव के प्रभु बाँह धरौ अब पार लगाय।।*
शोभामोहन
भगवान राम अवध
आगमन आनंद (अरविंद सवैया)
कलशा रखके
फुलकाँस चरू दियना अउ आरुग घीव डराय।
सबके अँगना अउ
खोर गली शुभ चाँदन-चौंक पुराय सुहाय।
खुँटियाय
लिपाय छुही चुक ले अउ मंगल बंदनवार सजाय।
फहरात धजा रँग
केशरिया अउ तोरन रंग बिरंग लगाय।
ममहावत हे घर
गाँव गली बगरात खुशी ल फुलेल छिंचाय।
शुभ मंगल गावत
गीत गिंयाँ बड़ झूल कहूँ मिरदंग बजाय।
लइका मन नाचत
गावत तौ तिरिया मन भेट निछावत लाय।
मन आगर थार
निकालत हे बड़की मइया मनि रत्न जड़ाय।
सब भाग
सुहागबती तिरिया अगुवावत हे हरि ला परघाय।
जस कोकिल गावत
गीत गड़ी सँभरे गहना गुरिया लदकाय।
तिय ड़ीठ उतारत
हे धरके मिरचा सरसों अउ नून मँगाय।
मुँड़ फेर
निछावर दान करा मँझली मइया प्रभु ला घर लाय।
मन ग्लानि भरे
सपटे-सपटे सब देखत हे चुप नैन छुपाय।
प्रभु जान
तहाँ मन के गति ला सबले पहिली उँकरे कर जाय।
कतको समझावत
हे तब ले पथरा जइसे छतिया लदकाय।
छुटकी मइया
पुरगे बर तो अब काबर हौ अइसे कँदराय।।
सब देवन फूल
झड़ी करके, प्रभु के प्रभुता गुन सुंदर गाय।
लउहावत आवत
बाल सखा, मिलके गर नैनन ला बरसाय।
सब नौकर चाकर
पाँव परे, धकियावत एक ल दूसर जाय।
सुख पावत बरने
पाय नहीं, सहसों मुख शेष व शारद माय।।
शोभामोहन
अवध मे राम
अगवानी (अरविंद सवैया )
(१)
खुँटियाय
लिपाय छुही चुक ले अउ मंगल बंदनवार सजाय।
सबके अँगना अउ
खोर गली शुभ चाँदन-चौंक पुराय सुहाय।
फहरात धजा हर
केशरिया अउ तोरन रंग बिरंग छवाय।
कलशा रखके फुलकाँस
चरू दियना गउ आरुग घीव डराय।
(२)
ममहावत हे घर
गाँव गली बगरात खुशी ल फुलेल छिंचाय।
शुभ मंगल गावत
गीत गिंया बड़ झूल कहूँ मिरदंग बजाय।
लइका मन नाचत
गावत हे तिरिया मन भेट निछावत लाय।
मन आगर थार
सजावत हे बड़की मइया मनि रत्न जड़ाय।
(३)
सब
भागसुहागबती तिरिया अगुवावत हे हरि ला परघाय।
जस कोकिल गावत
गीत गड़ी गहना गुरिया संभरे लदकाय।
तिय ड़ीठ उतारत
हे धरके मिरचा सरसों अउ नून मँगाय।
मुँड़ फेर
निछावर दान करा मँझली मइया प्रभु ला घर लाय।।
(४)
मन ग्लानि भरे
सपटे-सपटे सब देखत हे चुप नैन छुपात।
प्रभु जान तभे
मन के गति ला सबले पहिली उँकरे कर जात।
कतको समझावत
हे तब ले पथरा जइसे छतिया लदकात।
छुटकी मइया
पुरगे बर ओ अब काबर हौ अइसे कँदरात।।
(५)
लगगे बड़ दाग
तिया तन मा छुटगे बिरहा सुत राउ परान।
जग छेदत बोलत
ठोलत हे हतभागिन छाति धसावन बान।
दुख ला नइ
जानय मोर कहूँ भरतौ समझै नइ पाय सुजान।
बहुरे दिन तोर
अगोर जियौं सुन राम कहूँ नइ तोर समान।।
शोभामोहन
२४/१२/२०२०
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