मंदारमाला
सवैया-7 (221×7+2)
लाला ललाला
ललाला ललाला, ललाला
ललाला ललाला
लला
बेरा पहाती
छरा के छिचैया व पानी भरैया बिदा होत हे ।
बेरा सँझाती बना
फूलबाती दिया के बरैया बिदा होत हे।
पानी भरे लान
लोटा सगा दे सरेखा करैया बिदा होत हे ।
दाई गये जान
के खेत कोठा म पैरा डरैया बिदा होत हे।
दाई व काकी
बड़ा बाप भाई, सुआ से रटैया बिदा होत हे।
जे फूल झेला
रहे ना अकेला, मया के बटैया बिदा होत हे।
वो फूलकैना, मयारूक मैना, उदासी कटैया
बिदा होत हे।
जे दीप्त नैना
कहै लाख बैना, मया मा डटैया बिदा होत हे।
उड़ागे चिरैया
सुआ ठाँव ले(मंदारमाला सवैया)
साजे सिंगारी
पिया के पियारी गये आज होके बिदा गाँव ले।
दाई ददा रोत
हे आलता देख छूटे हवै जे चिन्हा पाँव ले।
सुन्ना परे हे
गली खोर कोती पधारे उदासी सबो ठाँव ले ।
लीले सहीं आज
लागै जिहाँ जा उड़ागे चिरैया सुआ छाँव ले।।
बोली ठिठोली
मया के चिबोली धरे भाव ओली चले जात हे।
गौना कराये व
सेंदूर भरा के बंँधा रीत आँखी मले जात हे।
ओती उठै गोड़
ऐती कसै मोह मोती ह नैना ढले जात हे।
आँसू न छेके
सकै आज ओला भले लाग छूटे खले जात हे।
बेरा पहाती
छरा के छिचैया व पानी भरैया बिदा होत हे ।
बेरा सँझाती
बना फूलबाती ल दीया बरैया बिदा होत हे।
पानी भरे लान
लोटा सगा दे सरेखा करैया बिदा होत हे ।
दाई गये जान
के खेत कोठार पैरा डरैया बिदा होत हे।
शोभामोहन
०७/०४/२०२१
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