Thursday, 16 March 2023

सर्वगामी सवैया

 

सर्वगामी सवैया

आड़ा बना ओरझाये लड़ाये भिंड़ाये बहाना बनाये ग तोला।

तैं जंगली जान पाये न बैरी चले चाल भाई ल मारे अबोला।

बैरी लुकाके करे घात तेला कभू जान पाये नहीं हाय भोला।

रक्सा ढ़िलाये हवैं लाल आतंक तोला फँसाये जनाथे ग मोला।।

शोभामोहन

न जाने (सर्वगामी सवैया)

खेती बियासी किसानी अपासी झिपारी कुलापा पलानी न जानै।

दौंरी न गाड़ा गुड़ी गाँव माड़ा नहीं खेलवारी छलानी न जानै।

पोता न जोता न चोता सरौता घनौची कठौता

दलानी न जानै।

छूटे हँड़ेरा मुँड़ेरा सगा जात गोती तभो ले गलानी न जानै ।।

बारी व ब्यारा कुँआ पार टेंड़ा न पाटी पठौंहा न खावा न जानै।

औना न थौना न दौना न रौना न घूरी सुने हे न आवा न जानै।।

कोठी न डोली न खोली अकोली सुने हे न छान्ही न छावा न जानै।

गे हे कमाये व खाये तिहाँ छोट खोली धँधाये अलावा न जानै।

शोभामोहन

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