सर्वगामी
सवैया
आड़ा बना
ओरझाये लड़ाये भिंड़ाये बहाना बनाये ग तोला।
तैं जंगली जान
पाये न बैरी चले चाल भाई ल मारे अबोला।
बैरी लुकाके
करे घात तेला कभू जान पाये नहीं हाय भोला।
रक्सा ढ़िलाये
हवैं लाल आतंक तोला फँसाये जनाथे ग मोला।।
शोभामोहन
न जाने (सर्वगामी सवैया)
खेती बियासी किसानी अपासी
झिपारी कुलापा पलानी न जानै।
दौंरी न गाड़ा गुड़ी गाँव माड़ा
नहीं खेलवारी छलानी न जानै।
पोता न जोता न चोता सरौता
घनौची कठौता
दलानी न जानै।
छूटे हँड़ेरा मुँड़ेरा सगा जात
गोती तभो ले गलानी न जानै ।।
बारी व ब्यारा कुँआ पार
टेंड़ा न पाटी पठौंहा न खावा न जानै।
औना न थौना न दौना न रौना न
घूरी सुने हे न आवा न जानै।।
कोठी न डोली न खोली अकोली
सुने हे न छान्ही न छावा न जानै।
गे हे कमाये व खाये तिहाँ छोट
खोली धँधाये अलावा न जानै।
शोभामोहन
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