Thursday, 16 March 2023

शार्दूल विक्रीड़ित छंद बेटी बिदा असीद गीत

 

बेटी बिदा असीद गीत

(शार्दूल विक्रीड़ित छंद)

 $$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$

न्यौता पीतरदेव डीह पुरखा,

जोड़ा म फेरी करे।

दाई बाप मनात देव कुल के,

छाया हँथेरी करे ।।

बाजा माँदर झाँझ माँझ झनके, 

आमा सजे द्वार हे।

लाने बाँस कटा गड़ाय मड़वा,

जोड़े सगा पार हे।।  

$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$

कैना तेलमऊर  हाथ हँथवा,

फूफू सुवासी धरे ।

भौजी पीस लगात तेल हरदी,

दाई ह आँँछी करे ।

जम्मो नेग नता निभात बढ़के,

बोली सुवासी भरे ।

आगे हे धरके बरात दुलरू,

कैना बिहाये बरे ।।

$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$

बेटी फूल सरीख आज सँवरे,

होये बिहाती खड़े ।

देवो आव असीद देव दुलहा,

हे भाग जागे बड़े ।।


जोड़ी-जाँवर हे फबे सुघर के,

सोला सिंगारी सजे ।

चूरी अम्मर होय माँग दमकै,

रानी दुलारी सजे ।।

सोहागीन सखी भरै अँजुरिया,

खावैं जुड़ावैं सदा ।

पाही आज असीद तेन फुरही,

आवौ असीदौ ददा ।।

$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$

काँटा गोड़ गडै़ झने जुगल के,

येही असीदै बबा ।

दूधे खाय नहा अँचोंय लइका,

येही असीदै कका ।।

होवैं एक ह एकईस बढ़के,

येही असीदै ममा ।

जोही हा फल फूलके मगन हो,

येही असीदै मया ।।

$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$

जोंड़ा पाँव पखार नैन जल ले,

आँसू ददा हे ढ़कै ।

दाई के गति ला बता शबद मा,

कोनो नहीं तो सकै ।।

भाई रोत कहै सुजान बहिनी,

भौजी कहै जा गड़ी ।

दाई के अउ नैन धार बरसै,

ना तो थिरावै झड़ी ।।

$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$

माया गाँव बिराजमान रहिना,

बेला लमा वंश के ।

जुग्गा नाम जगात भागधर हो,

जोड़ी चरौ हंस के।।

ओली मा शुभ के भरे अँजुरिया,

ड्योढ़ी अमाबे सुआ।

शोभामोहन देत हे बिदा बिटिया,

खाबे कमाबे सुआ ।।

$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$

शोभामोहन श्रीवास्तव

खुश्बूविहार कालोनी

23/06/2020

 

कौड़ी मोल बेचात आज मनखे

शार्दूल विक्रीड़ित छ.ग.

 

 

कौडी मोल बिकात आज मनखे,

देखौं बने छांट के ।

कोनो बेर जबान खातिर मरै,

होगे उही हाट के ।

बेंचें भांँज मलोय मान मनखे ,

होती मरे ठाठ के ।

दाना देख ललाय खाय दउरे,

होती अरे पाट के ।

बेरा में बिपती न चिन्हे सग सगा,

माया मया मत मता ।

चेते चेत चेराय चारा चुरमुरा

शोभामोहन

 

No comments:

Post a Comment

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...