तू महीन सी तुरपाई है
मासी की बेटी नहीं माॅ की नौ महीने की
महीन सी बुनाई है तूॅ
बेइष्तिहार अस्तर नहीं मेंरे बनने में लगे तागों
की महीन सी तुरपाई है तू
जेब के लिए छूटा हाषिया नहीं मेंरे वजूद के खाके की
आखिरी सिलाई है तूॅं
षुभचन्द्रसूर्या षोभामोहन
पद्मा के प्रति
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