मैं तेरे संग आउ कैसे
मै तेरे संग आउॅ कैसे खुद को तेरा बनाउ कैसे
बाठ सुने सारे अंजाने अनजाने सब तानेबाने
तुम ही मुझको समझ सकोगे पर मैं तुम्हे बुलाउ कैसे
नयनों को उम्मीद उजाला हाथ लगा पर हश्र निराला
जो न बुझे वो दीपक तेरे लौ से मगर जलाउॅं कैसे
मै तेरे संग आउॅं कैसे खुद को तेरा बनाउॅ कैसे
षुभचन्द्रसूर्या षोभामोहन
No comments:
Post a Comment