Saturday, 11 February 2023

षहर बोले गाॅंव चुप बैठी रही

 

गाॅंव चुप बैठी रही

  

षहर बोले गाॅंव चुप बैठी रही

धूप बोले छाॅंव चुप बैठी रही

 

चलते चलते हासिलों को जोडती

घुंघरू बोले पाॅंव चुप बैठी रही

 

डोंरियों ने बाॅंधे रक्खा घाट पर

लहर बोले नाव चुप बैठी रही

 

कौन सी भाशा अबोली सीखकर

दर्द बोले घाव चुप बैठी रही

षुभचन्द्रसूर्या षोभामोहन

 

 

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