दिन है जिसका रात उसी का
दिन है जिसका रात उसी का,आया सब मेंहमान उसी का
साॅंसों की संपदा उसी की, जीने का सामान उसी का
षिल्प है जिसका षैली उसी की, कृति में आया प्राण उसी का
षून्य पृश्ठ हाषिया उसी का , षब्दों का अरमान उसी का
हाथ है जिसका काम उसी का, गति-मति और लयतान उसी का
मेंरा मेंरापन भी उसी का, मान षान अभिमान उसी का
षुभचन्द्रसूर्या षोभामोहन
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