Sunday, 12 February 2023

ढॅूंढू बिखरी रंगरैली में

 

ढॅूंढू बिखरी रंगरैली में

 

तेरी बानगी मुझमें है मगर एक अजब अपरिचित षैली में

मैं फिरूॅ नेह चूकी नगरी ढूॅंढू बिखरी रंगरैली में

 

परिचय क्या बिरहीन का पथ से हर गली गयी गोधूल रथ से

तन पर यह मालिकपन मन का अखिॅंयन रख बैठी थैली में

 

मंज गयी मूर्खता अनधोयी कितना गायी कितना रोयी

आखिर उजास बूझूॅ कैसे 

रख हिया तलैया मली में

 

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