Sunday, 12 February 2023

मेरे हर काम से होकर मेरे होने की बू आये

 

मेरे होने की बू

 

मेरे हर काम से होकर  मेरे होने की बू आये

छुपाना मैं जिसे चाहॅूं, वही बस हूबहू आये

 

मेरी खामी मुझे दिखती नही , दुनिया दिखाती है

नहीं मै कुछ भी खुद बनती हॅंू जो दुनिया बनाती है

 

रहॅंू हद से सभी बाहर के, चीजों के लिए पागल

कभी इसके लिए पागल, कभी उसके लिए पागल

 

ये पागलपन नहीं जाता भले ही जान जाती है

नहीं मै कुछ भी खुद बनती हॅंू जो दुनिया बनाती है

 

लिखा मैने उन्हीं गीतों को, ही मैं गा नहीं पायी

समझ में आयी कुछ बातें, मगर समझा नहीं पायी

 

मेरे औकात से कोषिष हमेषा हार जाती है

नहीं मैं कुछ भी खुद बनती हॅंू जो दुनिया बनाती है

 

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