अभिनंदन रत् आगम के पथ
सुंदर वसन सुवासित सज्जित उर इच्छा अवगुंठन लज्जित
रोम -रोम नत श्रद्वा अवनत् अभिनंदन रत् आगम के पथ
उद्वेलित उद्विग्न उश्ण मन आन्दोलित विचलित बोझिल तन
संचित रखूंॅ कहाॅं हे प्रिय धन अर्थ विहल और षब्द असंयत
अभिनंदन रत् आगम के पथ
बिलग रंग भर मौन रंगोली नयनो की याचना अबोली
दग्ध बर्हि अन्तर हिय होली दृश्टिबिंदु प्रिय के पथ पर रत्
अभिनंदन रत् आगम के पथ
ष्वाॅंस फूल झरते हैं झर-झर स्वर गूॅंजे आषाएॅ भर-भर
नत लोचन आबद्व युगलकर अश्रु अवष देह मृदु जडवत्
अभिनंदन रत् आगम के पथ।
षुभचन्द्रसूर्या षोभामोहन
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