छोड पिंजरा प्राण पिया
छोड पिंजरा प्राण पिया से, जब मिलने को जायेगा
तेरा कर कर जतन समेटा,
धन
दौलत रह जायेगा
तोड तोड तृश्णा और आषा, छोड छोंड अब खेल तमाषा
क्या लाया जब आया था तो, जाते क्या ले जायेगा
घटा-घटा चिंता भ्रम और भय, हटा-हटा सब हो जा तन्मय
ष्याम रंग में जितना डूबेंगा, उतना ही सुख पायेगा
भाग-भाग सतसंग दान कर,
जाग-जाग
मत मलिन मान कर
इतना कर तू उनका हो ना हो, वो तेरा हो ही जायेगा
गुणा-गुणा करके गुन और धुन, सुना सुना अपनें सब अवगुण
गुरू का परम प्रकाष मिले तो, अंधकार मिट जायेगा
षुभचन्द्रसूर्या षोभामोहन
No comments:
Post a Comment