तेरा रंग
तेरा रंग है सारे जग से निराला, भाया यही रंग और रंग डाला
तेरे रंग से सारे रंगों की कीमत, तेरे रंग से हम बेरंगों की कीमत
एहसास है तेरे रंग में खुदी का, पाकर किया है उजाला-उजाला
तेरे रंग से हो रही साॅंसे धानी, तेरा रंग रंगों की है राजधानी
तेरा रंग केसर बनाती है जोगन, तेरा रंग सादा तू है रंग वाला
तेरा रंग रचाती है फूलों में लाली, तेरे रंग रंगकर चहकती है डाली
तेरे रंग पर रंग अब क्या चढेगा, दूजा किसी ने कभी गर उछाला
कहाॅं यू रंगें होंगे जैसे रंगे है, रंगें होंगे लेकिन न एैसे रंगे है
तेरे रंग जैसा नहीं रंग कोई, अंजान रंगों की अनबूझ माला
षुभचन्द्रसूर्या षोभामोहन
No comments:
Post a Comment