Sunday, 12 February 2023

सुख डग भरते उसी गली में

 

सुख डग भरते उसी गली में

 

जिस मग से दुख धूलि उडाते सुख डग भरते उसी गली से

भानु एक बॅूद नहीं रखता लौटाता फिर से बदली से

 

समय रात को सुबह बनाने सूरज तेरी ओर करे

काला को अकलंकित करने कोयल में संगीत भरे

भौंरा भी छूने से पहले अगनित पूछे प्रष्न कली से

जिस मग से ,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 

किसका पुण्य चरण धरती के आॅंगन-आॅंगन धूप खिलाती

षब्दों को मंजूर न करती श्रेय सभी वापस लौटाती

होनी बाॅंटे बैठ कर्मफल संवेदन छू छू उंगली से

जिस मग से ,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 

षुभचन्द्रसूर्या षोभामोहन

 

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