आज तेरी जो डोली निकली
आज तेरी जो डोली निकली बाराती नाती नंदोई
सिसक रहा आॅंगन गलियारा जाने तू क्या चीज संजोयी
कैसे कौन बुलाया तुमको कोई रोक न पाया तुमको
इस जग का नाता-आहाता भुला गयी तू सोयी सोयी
स्बको अपने गले लगाती,
अनजानों
पर नेह लुटाती
तेरे जैसा तो इस जग में, हो पाता है कोई कोई
षुभचन्द्रसूर्या षोभामोहन
।।भूरीदाई नारायण की पत्नी को समर्पित।।
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