Saturday, 11 February 2023

मुक्तक

 मुक्तक 

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बडे सलीके से जो अपनी बात कहते हैं

सब यकीं करते हैं जो दिन को रात कहते हैं

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ठतनी सी बात सारे जमाने को खल गई

कि दो कदम मैं क्योंकर मर्जी से चल गई

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तेरी सूरत से मिलाती हॅंू जब मेरी सूरत ।

मेरी खो जाती है मिल जाती हैं तेरी सूरत ।।

 

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तैर के केवल राह मिलेगा डूबोगे तो थाह मिलेगा ।

डूब मरे तो राम मिलगा, लौट गये तो वाह मिलेगा ।।

 

 

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अलविदा अपमान सहकर जा चुकी सुकुमारियों को ।

क्या करूॅं बेचारगी की घर हुई बिमारियों को ।।

 

अलविदा ये जगत समझेगा नहीं अब मोल मेरा ।

अलविदा गूॅंजेगा सम्यक् सृष्टि भर अब बोल मेरा ।।

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