दुखदेव
दुखदेव स्वयं मन मेरा दुख देवी का चिर फेरा
पसरे चित्त में पाले ताने पीडा धर जाने अंजाने
टूटे न गुरू बिन घेरा दुखदेव स्वयं मन मेरा
आषा गढ-गढ कर निराष सपने करते है दुख विकास
यह चित्त अहेतु चितेरा दुखदेव स्वयं मन मेरा
षुभचन्द्रसूर्या षोभामोहन
No comments:
Post a Comment