Wednesday, 22 February 2023

अंग्रेजी शिक्षा ले उपजे विचित्र ज्ञानी(छन्द:शार्दूल-विक्रीडित)

अंग्रेजी शिक्षा के विचित्र ज्ञानी
(छन्द:शार्दूल-विक्रीडित)

लालाला लल लाल लाल ललला,  लालालला लालला

अंग्रेजी पढ़ ब्यर्थ गर्व भर के, थोथा धरे ज्ञान ला।
भारी कार दुमंजला घर ले, पाथें बड़ा मान ला।।
खेती बेंच पढ़ाय बाप अब तो, वोला भुलागे हवे।
गाथे दूसर के गुनान गुन ला,
माथा खियाथे नवे।। १।।

पैसा ले सब तोल मोल करथे,
देसी सुहावै नहीं।
भाखा गाँव गँवार सोझ कहिके,
बोलैं बतावैं नहीं।।
देसी बस्त्र बिचार यार सबले, नत्ता सबो टोर के।
मोबाईल धरे रोज खोज करथे, डाटा मितू जोर के।। २।।

भूले संस्कृति धर्म कर्म सब ला, सेवा करै आन के।
टेंटें बोलत गोठ मोठ झबरा, छाती बड़ा तान के।।
पूजा पाठ पुरान बेद बिसरे, रंगे नवा रंग हे।
भोगै भौतिक लाभ लोभ लपटे, रोगी बने अंग हे।।३।।

जाने योग प्रयोग चाव नइ हे, गोली दवा लेत हे।
पार्टी रात मनात नाच कुदके,
पाछू कती चेत हे।।
कोनो के नइ तो सुनै बचन ला,
पिज्जा सरे खात हे।
थूके हे रकसा पठोय पहिली,
तब्भो मजा आत हे।।४।।

नाथे हे कस के कसाय कपड़ा,
फंदा नरी डार के।
मोट्ठा जींस फटे चिराय जुनहा,
रेंगै डियो मार के।।
राखै सोच नवा गुनान बड़का, विज्ञान वाला बने।
दाई बाप हवैं अनाथघर मा,
आवै न देखे सुने।। ५।।

शोभामोहन श्रीवास्तव
फागुन अंजोरीपाख दूज
२२/०२/२२

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