Sunday, 12 February 2023

उम्मीद एक दिन टल गया

 

उम्मीद एक दिन टल गया

 

षून्य में वह सार दीपक जल गया

देंह का आकार आखिर फल गया

 

ओस की जब बूॅंद मचली प्रेम में

सूर्य का अभिमान सारा गल गया

 

आज का दिन दे गया भारी सूकुन

कम से कम उम्मीद एक दिन टल गया

 

प्रष्न बस सारे खडा किये वो सामने

ढूढने जो समस्या का हल गया

षुभचन्द्रसूर्या षोभामोहन

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