Tuesday, 21 July 2020

एकावली छंद 5-5 पर यति
चार चरण दो-दो चरण सम तुकान्त।
एकावली छंद
तोर ले ,आस हे ।
दरस के, प्यास हे ।।
हाँस के, रो डरौ ।
भीतरी, मा चुरौं ।।
पूछहूँ, कोन ला ।
तोर घर, के पता ।।
तँय बता, दे पिया।
नानकुन, हे दिया।।
पुरोबे, ते नही ।
आस मैं, हौं बही ।।
शोभामोहन
30/09/19
Shobhamohan Shrivastava
हा हा
कमेंट करें

No comments:

Post a Comment

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...