/रेणकी छंद (मन के गति)
मन झपकत पलक जगत गिंजरत अउ,
चटकत फकत बिषय कर हे ।
समझत नइ अशुभ व शुभ बन बरकस,
टरकत बिदक करत थर हे ।
सब बिषयन डहर लहस मन लपकत,
मग अहलन डहर चलत भर हे ।
मन कस नइ अजब-गजब नटखट जग,
भटकत-अटकत चर-चर हे ।
शोभामोहन
१३/०१/२०२०
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