नइ भटकन चौरासी
मनखे करम निहारत प्रभु ला,
आवत हावय हाँसी ।
फेर मरन नइ फेर जनम नइ,
नइ भटकन चौरासी।२
मइलाये अंतस ला धोये,
बनबो ईश उपासी ।।२ नइ भटकन...........
लोभ मोह माया अहमइती,
जीयत मर नइ छूटे।२
चोला चुटकी चूरी जइसे,
चुटले चुटके टूटे ।।२
सबो लमाये लाटा-फाँदा,
बन हावय गरफाँसी।२ नइ भटकन..........
बिरवा वो हरियाथे जेकर,
थाम्हन पाथे पानी।२
तइसे अंतस किरवारे बिन,
बिरथा ए जिनगानी।।२
गरब भरे पन आही-जाही,
काया परही साँसी ।२ नइ भटकन............
शोभामोहन
०२/०८/१९
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