बदनाम बदरिया
सावन के बदनाम बदरिया
बिन बरसे मिटकाय हवय।।
अउ किसान के किस्मत देखव
कइसे माथ नवाय हवय ।।
उमड़त हे सागर मे लहरा
घुमड़त हे नभ में बादर ।
गरजत चमकत एती ओती
फेर नही बरसत काबर ।।
करम ठठाके करमइता मन
ईश्वर ला गोहनाय हवय ।।
रात रिसाये अँईठे अँईठे,
आँखी के हे नींद गँवाय ।
सुख सुरता कर जुन्ना सुम्मत
साँसा साँसी मुँदत जाय ।।
संसो के चौपाई गावत
चारो मूड़ा रुँधाय हवय।।
शोभामोहन
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