Tuesday, 21 July 2020

बदनाम बदरिया
सावन के बदनाम बदरिया
बिन बरसे मिटकाय हवय।।
अउ किसान के किस्मत देखव
कइसे माथ नवाय हवय ।।
उमड़त हे सागर मे लहरा
घुमड़त हे नभ में बादर ।
गरजत चमकत एती ओती
फेर नही बरसत काबर ।।
करम ठठाके करमइता मन
ईश्वर ला गोहनाय हवय ।।
रात रिसाये अँईठे अँईठे,
आँखी के हे नींद गँवाय ।
सुख सुरता कर जुन्ना सुम्मत
साँसा साँसी मुँदत जाय ।।
संसो के चौपाई गावत
चारो मूड़ा रुँधाय हवय।।
शोभामोहन

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