आल्हा
बेरा डंगनी अकन बचे हे,
अउ जाना हे अबड़ दूर ।
अँगना के गोंदा मोंगरा मन
आँखी मा नावत हे धूर।।
चरचर ले फूले ममहावत,
फूल झुमर के तीर बलाय।
मन बहमतिया असन लगत अउ
बिगन पंख अंबर छू आय ।।
गमक लुटावत पवन फिरत हे,
मन के बंधना बोचक जाय ।।
मया म मुहरन पूजे जावत,
लोग कहत का धर लिस बाय ।।
शोभामोहन
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