चौघड़िया छंद
लिखा जाता है जो 16 और 12 मात्राओं पर यति का मात्रिक छंद है सम चरण तुक ।
1/
ना तो बोले-चाले चिटको,
ना तो वो मुस्कावै।
का होगे हे संगवारी ला,
कुच्छु समझ नइ आवै।।
2/
कोनजनी काबर रहिथे ते,
चुप-चुप मुँह ल फुलोये।
काकर सुरता आथे तेमा,
रहिथे खोये-खोये।
3/
बिहिना जाथे कहाँ-कहाँ ते,
संझा कुन घर आथे।
एको टप्पा बोल चाल नइ,
बइगुन समझ न आथे ।।
शोभामोहन
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