Tuesday, 21 July 2020

चारो भइया पे जावौं, बलिहार गुँइया

चारो भइया पे जावौं, बलिहार गुँइया ।
धन-धन होगे भाग ह हमार गुँइया ।।
माथ मा मटुकिया सोहत रगरग ले ।
मुचमुच हाँसी मुँहरन जगजग ले ।।
आँखी नहीं थकत निहार गुँइया ।
चारो भइया पे जावौं बलिहार गुँइया ।।......1
घुँघराली केश हे बरत कस आँखी।
गोठ झरै मधु सिरतोन गउ साखी।।
कुछु बूता झन आँखी ला तियार गुँइया ।
चारो भइया पे जावौं बलिहार गुँइया ।।......2
मोती मनि जड़े गर पहिरे हे माला ।
पँहुची मुँदरी हीरा बरत निराला ।।
चारो कोती होगे उजियार गुँइया ।
चारो भइया पे जावौ बलिहार गुँइया ।।......3
शोभामोहन जेकर गावत हे जस ला ।
काटे बर मन अँधियारी बरकस ला ।।
जेकर हे महिमा अपार गुँइया ।
चारो भइया पे जावौं बलिहार गुँइया ।।......4
शोभामोहन श्रीवास्तव
28/06/2019
सोंढ़ बेरला बेमेतरा
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