Tuesday, 21 July 2020

रूपमाला रूपमाला, रूपमाला रूप
2122 2122, 2122 21
(१)
देह मनखे के मिले हे, भाग ला सहराँव।
गीत के बरदान पाके, ईश के गुन गाँव।।
नानकुन भूलोक कुटका, राज जेकर आज।
तेन ला काबर रिझाहूँ, छोड़ जग महराज।।
(२)
जेन सत्ता ताश पत्ता, के असन गिर जाय ।
माथ ओला का नवावौं, प्रभु परम बिसराय।।
चर अचर जम्मो जगतपति, के शरन मे जाँव ।।
गीत के बरदान पाके, ईश के गुन गाँव ।।
(३)
साध के बिरवा जगाके, दुख नहीं परघाँव ।
जानथौं रखथे सजन सुख, मा हथेंरी छाँव।।
चाकरी जग के करत छिन,भर नहीं बिसराँव ।
गीत के बरदान पाके, ईश के गुन गाँव ।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
०३/०६/२०२०
खुश्बू विहार

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