मजदूर (जयकारी छंद)
गोड़ गड़े काँटा ला हेर ।
रेंगत हस बिन पनही फेर ।।
सुर्रावत जिनगी के नेर ।।
कोन करत रे चर्चा फेर ।।
धनवंता ह ससन भर पेर ।
फेंकिस चूस रसा सब हेर ।।
कहूँ करत हे सोग दबेर ।
आँखी ला ललियात तरेर।।
लुलुवावत हस जाँगर पेर ।
सब डेरउठी धक्का फेर ।
दुख ला कहिबे काकर मेर ।
कोन सुनही कपिला टेर ।।
तोरे बल मा बनिस कुबेर ।
नइ पूछिस दुख मा एक बेर
गाँव डहर अब चल रे शेर।
छोड़ गिंजरना पर के घेर ।।
अउ कुबेरहा दिन लड़ेर ।।
काम काज करके बिन ढ़ेर ।।
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