Tuesday, 21 July 2020

लाललाला लाललाला लालला
2122 2122 212
माँस बेचाथें गुड़ी अउ हाट मा ।
फेर दुख के कोन लेवनहार रे ।
साध के शासन चलै जे गाँव मा,
देंह के होती अउ लाचार हे ।।
सोन पिंजरा मा बता सुख का सुआ,
पंख जब कतरा गये तुँहार हे ।।
कोन हर तोला बचावै बोल तो,
जब लगे आगी सबो संसार हे ।।
शोभामोहन
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