रंग बसंती कहरवा छंद
माते असन चलत पुरवइया ।
लचके डारा झूल झूलत हे ।।
गद हरियर हे बाग बगीचा ।
रंग रंग के फूल फूलत हे ।।
टरत नहीं हे भौरा निरघट।
फूल माँझ जा मिलत-जुलत हे ।।
भुनुन-भुनुन कर चेर लेत तब।
कली कली के ओंठ उलत हे ।।
रंग संग के चुटुक चढ़े हे ।
मरे-सरे बर सबो तुलत हें ।
कोंवर परस परत पुरवइया,
अपन-अपन सब होश भुलत हे ।
रंग बसंती छाये सरभर
मन बउराये असन ढुलत हे ।।
सरग बरोबर लगत बगइचा,
सबो मया मा कुलक बुलत हे।।
महर-महर ममहावत मधुवन
आँखी ताके नइ भूलत हे ।।
गद हरियर हे बाग बगीचा ।
रंग रंग के फूल फूलत हे ।।
शोभामोहन
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