Tuesday, 21 July 2020

जागत दियना जागत रात।
हाँसत चंदा भागत रात ।।
बिगन मिटाये घाव ल जुन्ना,
कोड़ उकालत लागत रात ।।
सुरता सरबाँवट तन धरके
गिंजरत गोली दागत रात ।
हाथ बात प्रभुवर के दुख सुख,
तिसना उखरा पागत रात ।।
शोभामोहन
३१/०५/२०२०
लाइक करें
कमेंट करें

No comments:

Post a Comment

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...