उत्ती लाली घेरा देख ।
पँपपँगात हे बेरा देख ।।
जीव अपन होती बिसराये।
गिंजरत भूत बहेरा देख ।।
बोंय बराये बिगन बीजहा
कस गहदात लमेरा देख ।
चेतत नइ हे आगू सँउहत,
ककरो उसलत डेरा देख ।
बिरथा जोरन जोर रपोटत
होवत हवय कुबेरा देख ।।
शोभामोहन
३१/०५/२०२०
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