ड़ विचित्र लगथे संसार ।
ककरो बर तो नियम हजार।।
अउ कोनो हर बने विशेष ।
टोर नियम ला करथे ऐश ।।
नियम एक हे कहिथे लोग ।
बात नहीं ए माने जोग।।
देख भतीजा भाई वाद ।
दिखथे सबो जगह आबाद ।।
टारे बिन विशेष अधिकार ।
मन मा खटका होय सवार।।
काबर नियम नहीं समान ।
भेद बता दौं हे गुनवान ।।
शोभामोहन
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