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मन की हालत
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(१)
रे मन चंचल जा गिंजरे झन,
चेत लगा अब ईश्वर कोती ।
हे दुख ना सुख ये जग मा सुन,
भाव बियापत जम्मो जोती।
एक समान घटै घटना सब,
फेर बनै दुख या सुख सोती।
जेन दशा मन हा जनवावय,
तेन ल जान सकै यह होती।
(२)
साध नहीं पुरही बुड़बे दुख,
साध पुरे सुख मा बउराबे ।
साध सधाय बँधाय रहे बर,
आगर आगर आस लमाबे ।
जान दही कपसा झन खा सुन,
फेर नहीं मिलही पछताबे ।।
जेन हवै सबले बड़का सुख,
वो सुख ला तब तो सपड़ाबे ।
पार सबो सुख के दुख के रहि,
अंतस देव परान जगाबे ।
(३)
जे नत ला कहि सुंदर रूपस,
मोह मया ममता अगराबे ।
छूटत जीव मशान चले बर,
प्रीत भुला अबड़े लउहाबे ।
डार चिता पँचलाकड़िया अउ,
पाँत धरे नदिया म नहाबे ।
आ घर पालथिया बइठे अउ,
पेट लगे अगनी ल बुताबे।
शोभामोहन
१०/०५/२०२०
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