Tuesday, 21 July 2020

*🚩मन की हालत🚩*
(१)
रे मन चंचल जा गिंजरे झन,
चेत लगा अब ईश्वर कोती ।
हे दुख ना सुख ये जग मा सुन,
भाव बियापत जम्मो जोती।
एक समान घटै घटना सब,
फेर बनै दुख या सुख सोती।
जेन दशा मन हा जनवावय,
तेन ल जान सकै यह होती।
(२)
साध नहीं पुरही बुड़बे दुख,
साध पुरे सुख मा बउराबे ।
साध सधाय बँधाय रहे बर,
आगर आगर आस लमाबे ।
जान दही कपसा झन खा सुन,
फेर नहीं मिलही पछताबे ।।
जेन हवै सबले बड़का सुख,
वो सुख ला तब तो सपड़ाबे ।
पार सबो सुख के दुख के रहि,
अंतस देव परान जगाबे ।
(३)
जे नत ला कहि सुंदर रूपस,
मोह मया ममता अगराबे ।
छूटत जीव मशान चले बर,
प्रीत भुला अबड़े लउहाबे ।
डार चिता पँचलाकड़िया अउ,
पाँत धरे नदिया म नहाबे ।
आ घर पालथिया बइठे अउ,
पेट लगे अगनी ल बुताबे।
शोभामोहन
१०/०५/२०२०

No comments:

Post a Comment

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...