गुरुबर मोर सुनौ गोहार
(जयकारी छंद)
गुरुबर मोर सुनौ गोहार ।
ड़ोंगा मोर लगा दौ पार ।।
रहिथौं तुँहर भरोसा भार।
कलकुत ड़ंडासरन तुँहार ।।
रद्दा मा हे अड़बड़ आड़ ।
देवै करम कहूँ झन छाँड़ ।।
रेंगत हावँव खारे -खार ।
गुरुबर मोर सुनौ गोहार ।।
हौ उदार बड़हर महराज।
हाथ तुहर अब हावै लाज।।
उतरे दहरा पार अपार ।
गुरुबर मोर सुनौ गोहार ।।
ज्ञानमूर्ति हौ हे भगवान ।
मोला निचट अड़ानी जान।।
मोर उपर कर दौ उपकार ।
गुरबर मोर सुनौ गोहार ।।
फरसा ज्ञान तुहँर बड़ धार ।
काटौ मन घपटे अँधियार ।।
करौं केलौली बारम्बार ।।
गुरबर मोर सुनौ गोहार ।।
शोभामोहन
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