छत्तीसगढ़ी चेतौना भजन
बुढ़ौंतीपन (जयकारी छंद)
खँगही जे दिन हाथ व गोड़ ।
बिरथा लगही सब गठजोड़ ।।
देंह झपाही अनगिन रोग ।
अउ कोनो नइ करही सोग ।।
छाती मा अँगरा कुढ़वाय ।
ओ दिन परही बड़ पछताय ।।
कोनो हर नइ सुनही बात।
गिरबे तौ नइ धरही हाथ ।।
गुनत रहिबे दिन अउ रात ।
मया मोह के बदला घात ।।
आँखी घपट जही अँधियार ।
बइठे रहिबे मन ला मार ।।
बने डेहरी के रखवार ।
हूँत कराबे बारम्बार ।।
कोनो हर नइ देही कान ।
तोर करेजा लगही बान ।।
झुकुर झुकुर हो जाही नैन।
बेमतलब हो जाही बैन ।।
टूट जही लोहा कस दाँत।
नही समझ मा आही बात।।
छूट जही सँगवारी साथ ।
अरे नहीं कुछु आही हाथ ।।
नही सुहाही ए संसार ।
अंग ओढ़ना लगही भार।।
मनखे चोला दुर्लभ जान ।
का करना तेला पहिचान ।।
सुमिरे धर ले पबरित नाम ।
दुख नइ ब्यापन देवै राम ।।
शोभामोहन
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