फूल ल आँखी खोजत रहिगे,
गोड़ म गड़गे हबले काँटा।
दुखिया भाग एकंगू होगे,
सुख के लेलिन सब झन बाँटा ।।
मधुरस झारत रहय तेन मन,
फूल डहर हो गइन उराठी ।
हवन करत जब हाथ लेसागे,
अंतस भइस अकेल्लाबाठी ।।
धरे अगोरा पलक न झपके,
वो नइ हिरक निहारत हे।
बेरा के सब बात घात गुन,
आँखी हर आँसू झारत हे।।
शोभामोहन
१४/०१/२०२०
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