*मनहरण घनाक्षरी*
रेंगे बर तोर बाट, मन ला करै उचाट,
अइसन साध प्रभु, दया कर टार दे ।
हालै डोलै झन मन, थीर जल से बसन
मगज मा मया दया, भगति पधार दे ।
साधू संत सतसंग, रंग दे उँकर रंग,
सब रंग छोड़वा केसर रंग डार दे ।
जनम-जनम चल, नइ जेन बाट भल,
"शोभामोहन"ला जग बाट ले उबार दे ।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
११/०६/२०२०
खुश्बू विहार कालोनी
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