Tuesday, 21 July 2020

जुन्ना शब्द मन उपर छत्तीसगढ़ी के विद्वान मनके उदासीनता ला देखके अइसे लागथे कि छत्तीसगढ़ी के मूल स्वरूप हर गँवा जही, देखब म आथे जेन मन छत्तीसगढ़ी में हिन्दी अंग्रेजी के जस तस लिखे के वकालत करथें ओमन छत्तीसगढ़ी के जुन्ना शब्द मन ला खारिज कर देथें । मैं भाषाविज्ञान के विद्यार्थी होय के नाते अतका कहना चाहत हँव कि भाषा हर न कभू नवा होय न जुन्ना होय भाषा हर हाल में आगू बढ़थे । भाषा के पढ़इया लिखइया अउ बउरइया मन नवा जुन्ना होथे । शब्द तो शाश्वत ए ब्रम्ह ए न तो ओला कोनो बना सकय न मिटा सकय । हिन्दी अंग्रेजी के शब्दकोश मन सबो भाषा बोली के शब्द मन ला ठ उर दे हें तव छत्तीसगढ़ी में घलो सब ला बउरे के सुभिता होना चाही फेर छत्तीसगढ़ी के मौलिकता संग छेड़छाड़ घलो नही होना चाही । छत्तीसगढ़ी के शब्द भंडार हर गरिमामय हे अउ आगर ले आगर शब्दभंडार हर कोनो भी भाषा के मंडलपना ल सिधोय के जिनीस होथे । आपके बात छत्तीसगढ़ी अउ साहित्यकार मन के हित मे हे ।🙏🌸
शक्कर के श ला बउरे मा कोनो किसम के भेव नही होना चाही, जब मनखे शिक्षित नही रहय तब श अउ स के सूक्ष्म अंतर ला समझ नही सकय अउ श के बदला स बोल देवय अब बहुसंख्यक पढ़े लिखे हे । जेन मन ला हिन्दी शब्द मन ला अंगीयाय में कोनो किसम के असमंजस लागथे ओमन ला हमर पुरोधा कवि हरि ठाकुर के साहित्य ला खत्ता पढ़ना चाही ऊँकर एक किताब हे सुरता के चंदन जेन मा बिना भेदभाव के हिन्दी के शब्द जइसे प्रकृति शंभू अउ अनगिनत शब्द मन ला जस के तस बउर के हमर मन के बाट प्रशस्त करे हे । आ. सुधा दीदी आपके निर्देश ले सप्ताह में कम से कम दू दिन नवा बिहान में छत्तीसगढ़ी भाषा विमर्श करवाय जाही तव ए मंच के माध्यम ले हमर बोली भाखा तो समृद्ध होबे करही साथ हीं जुड़े जम्मो साहित्यकार मन के साहित्य के एक आदर्श स्तर बनाय मा मदद मिलही । सरला दीदी, दिनेश चौहान, वैभव भाई, हीरा भाई आप सवाँगे अउ कतको झन गुनागर मनखे मन ए समूह मा बिराजमान हे जेन मन भाषायी अस्मिता बर सरकार दरबार ले लेके दिल्ली के दुआरी तक छत्तीसगढ़ी बर बजनी बाजत हें तेन सब के लक्ष्य एक हे फेर रस्ता आने आने हे सब झन ला एक मंच में सकेलाय के जब्बर जरुरत हें । जय छत्तीसगढ़ जय छत्तीसगढ़ी 🙏🌸

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