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राजा ब इठे गुनत महल मा
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1/
राजा बइठे गुनत महल मा,
संसो बूड़े भारी हे ।
बाट बिकट हे जेमा जाना,
कर तलवार दुधारी हे ।।
2/
बिखदाँती टोरे बिखहर के,
गुपचुप करत तियारी हे।
लोकसता के चारो खंभा,
घुने खताय दिंयारी हे ।।
राजा बइठे गुनत महल मा.......
3/
घर देखै ते बाहिर देखै,
दुविधा हे लाचारी हे ।
रोग समझ मा आवत सब ला,
दिन्नी गजब बिमारी हे ।।
राजा बइठे गुनत महल मा.............
4/
नीक कहत हें खीख कहत हें,
बात चलत चरियारी हे ।
कोन सकै समझाये मूरख,
उलटा सीखा जारी हे ।।
राजा बइठे गुनत महल मा............
मार काट जे धरम सिखोथे,
धरम नहीं वो आरी हे ।
दूसर के होती नइ मानै,
जानौ नीयत कारी हे ।।
राजा बइठे गुनत महल मा..........
शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छ.ग.
०२/०५/२०२०
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