Sunday, 25 January 2026

विमलजला वर्णिक छंद

विमलजला छंद
112 111 12 = 8 वर्ण चार चरण। दो दो समतुकांत।


जिउ नेत धरत हे ।
जिउ पेट भरत हे।।
सुख ले चटकत हे।
दुख में अटकत हे।।
नइ ज्ञान सुनत हे।
बस आस तुनत हे। ।
कइसे अब करही ।
भव पार उतरही।।
नइ ज्ञान धरत हे ।
बस मान मरत हे।।

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