विमलजला छंद
112 111 12 = 8 वर्ण चार चरण। दो दो समतुकांत।
जिउ नेत धरत हे ।
जिउ पेट भरत हे।।
सुख ले चटकत हे।
दुख में अटकत हे।।
नइ ज्ञान सुनत हे।
बस आस तुनत हे। ।
कइसे अब करही ।
भव पार उतरही।।
नइ ज्ञान धरत हे ।
बस मान मरत हे।।
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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