भक्ति वर्णिक छंद
विधान तगण यगण, गुरु
221 122 2
7 वर्ण 4 चरण दो-दो चरण समतुकांत
लाला लल लालाला
राजा घर के लाला।
घूमे बनके ग्वाला।।
माला गुँगची गोई।
राजा कहिहै कोई ।।
भारी बिगड़े चाला।।
राजा घर के लाला।
घूमे बनके ग्वाला।।
हावै भँदई गोड़े।
कारी-कमरा ओढ़े।।
वो हे नखरा वाला।
राजा घर के लाला।
घूमे बनके ग्वाला।।
लाहो अबड़े लेथे ।
गारी कतको देथे।।
घेपै वह तो काला।
राजा घर के लाला।
घूमे बनके ग्वाला।।
फोरै मरकी गोई ।
डारे गर में नोई।।
लोक्खन के गोपाला।
राजा घर के लाला।
घूमे बनके ग्वाला।।
जाबो अब ये दारी।
देबो घुड़की-गारी।।
वो हे दिल के काला ।
राजा घर के लाला।
घूमे बनके ग्वाला।।
हेरै गुजरी तारा।
आये धर संगवारा।।
खाये अउ लौना ला ।
राजा घर के लाला।
घूमे बनके ग्वाला।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
25/01/2025
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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