Saturday, 24 January 2026

राजा घर के लाला (भक्ति छंद वर्णिक)

भक्ति वर्णिक छंद

विधान तगण यगण, गुरु
221 122 2
7 वर्ण 4 चरण दो-दो चरण समतुकांत
लाला लल लालाला

राजा घर के लाला।
घूमे बनके ग्वाला।।
माला गुँगची गोई।
राजा कहिहै कोई ।।
भारी बिगड़े चाला।।
राजा घर के लाला।
घूमे बनके ग्वाला।।

हावै भँदई गोड़े।
कारी-कमरा ओढ़े।।
वो हे नखरा वाला।
राजा घर के लाला।
घूमे बनके ग्वाला।।

लाहो अबड़े लेथे ।
गारी कतको देथे।।
घेपै वह तो काला।
राजा घर के लाला।
घूमे बनके ग्वाला।।
फोरै मरकी गोई ।
डारे गर में नोई।।
लोक्खन के गोपाला।
राजा घर के लाला।
घूमे बनके ग्वाला।।

जाबो अब ये दारी।
देबो घुड़की-गारी।।
वो हे दिल के काला ।
राजा घर के लाला।
घूमे बनके ग्वाला।।

हेरै गुजरी तारा।
आये धर संगवारा।।
खाये अउ लौना ला ।
राजा घर के लाला।
घूमे बनके ग्वाला।।

शोभामोहन श्रीवास्तव
25/01/2025

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