ममहाती अँचरा सुगंध ले,
सृष्टि डेहरी गमकत हे।
झुमरत डारा घुमरत भौरा,
फूलगमक सुँघ ठमकत हे।।
चालबसंती में सब संयम,
भितिया भारा भसकत हे।
काँदी पौंदर हरियर-हरियर,
नभ चमचम चम चमकत हे।।
कोनो पाँव लिखावत माहुर,
कोनो पैजन झमकत हे।
निरमल चंदा के अँजोर में,
रूप रूपसी दमकत हे।
चटक-मटक लुकरा के अँचरा,
चमचम चमचम चमकत हे।
चालबसंती में सब संयम,
भितिया भारा भसकत हे।
काँदी पौंदर हरियर-हरियर,
नभ चमचम चम चमकत हे।।
कोनो पाँव लिखावत माहुर,
कोनो पैजन झमकत हे।
निरमल चंदा के अँजोर में,
रूप रूपसी दमकत हे।
चटक-मटक लुकरा के अँचरा,
चमचम चमचम चमकत हे।
रसवन्तिन पुरवइया ठमकत
भुँइयाअँगना छाय बसंती ।
गोठ बसंती बात बसंती,
सहन-रहन बरताव बसंती।।
गोठ बसंती बात बसंती,
सहन-रहन बरताव बसंती।।
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