Tuesday, 27 January 2026

सृष्टि डेहरी गमकत हे। छत्तीसगढ़ी गीत


ममहाती अँचरा सुगंध ले, 
सृष्टि डेहरी गमकत हे।
झुमरत डारा घुमरत भौरा, 
फूलगमक सुँघ ठमकत हे।।

चालबसंती में सब संयम,
भितिया भारा भसकत हे।
काँदी पौंदर हरियर-हरियर,
नभ चमचम चम चमकत हे।।

कोनो पाँव लिखावत माहुर,  
कोनो पैजन झमकत हे।
निरमल चंदा के अँजोर में, 
रूप रूपसी दमकत हे।
चटक-मटक लुकरा के अँचरा,
चमचम चमचम चमकत हे।

रसवन्तिन पुरवइया ठमकत 
भुँइयाअँगना छाय बसंती ।
गोठ बसंती बात बसंती,
सहन-रहन बरताव बसंती।।  

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