Tuesday, 27 January 2026

तोर नाम के मुड़सरिया में, मुड़ टेकाये हौं जगहार।
मुड़पिरवा होगे जगनत्ता, असलग लराजरा लगवार।। 
जब आही गौंतरिहा सजन हर हमार।। 
अतरही बोहाना आँसू कर भेट अउ जोहार।। 
धीरलगहा शुभ सगुन जनाही निरधार। 
आँखी निच्चट जोहत फरिका ला उघार।
धरे दिन अगोरा के लागत हे पहार।।
जरे जीव कहत जरै अइसन रोजगार।। 

शोभामोहन श्रीवास्तव 

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