*भृंग छंद* विधान:- "ननुननुननु गल" पर यति, दश द्वय अरु अष्ट। रचत मधुर यह रसमय, सब कवि जन 'भृंग'।। "ननुननुननु गल" = नगण की 6 आवृत्ति फिर गुरु लघु। 111 111 111 111 // 111 111 21 20 वर्ण,यति 12,8 वर्ण, 4 चरण 2-2 तुकांत
जगर-मगर शहर-शहर, कहर-महर गाँव।
गुनत-धुनत कहत-सुनत,चलत सँभल पाँव।।
अगुन-छगुन गुनत-गुनत, कटत जबर बेर ।
गिरत-परत मनुख उठत, हलत-चलत फेर ।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
25/01/2025
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