का का भोगत नइ चोला।
घेरीबेरी देवत फेरा।
जनमन मरन बरोठा घेरा।।
कुलकत फुदकत दुबकत झुझकत,
उतरत जगदुखघर डोला।
का का नइ भोगत चोला।।
नानुक नाम धरे नइ हरि के।
लाटा-फाँदा दसठन परि के।।
कहरत सिहरत दँदरत कँदरत,
जीवपरे दुखमुखि टोला।।
नानुक नाम धरे नइ हरि के।
लाटा-फाँदा दसठन परि के।।
कहरत सिहरत दँदरत कँदरत,
जीवपरे दुखमुखि टोला।।
का का नइ भोगत चोला।
एकछिन खो झन शोभामोहन।
सुखकलशा सुंदर मुड़ बोहन।।
सटकत लटकत चटकत मटकत,
कलजुग भोगत हे तोला।।
एकछिन खो झन शोभामोहन।
सुखकलशा सुंदर मुड़ बोहन।।
सटकत लटकत चटकत मटकत,
कलजुग भोगत हे तोला।।
का का नइ भोगत चोला।।
शोभामोहन
शोभामोहन
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