Saturday, 24 January 2026

मनविश्राम वर्णिक छंद

(मनविश्राम छंद)
मनविश्राम छंद विधान:-  "भाभभुभाभनुया"=भगण की 5 आवृत्ति फिर नगण यगण। 211 211 211 2,11 211 111 122 कुल 21वर्ण, यति 10,11, चार चरण 2-2 समतुकांत

लालल लाललला ललला, ललल ललल लाला ।

जोहत नैन थकै नइ हे, सजन मिलन आजा ।
प्रीत लगे जबले तबले,
धिड़कत हिय बाजा।।
होत मतंग उड़ावत हे, मन हर नभ कोती ।
साज-सिंगार सिंगारत हे, नैन बरत जोती।।

शोभामोहन श्रीवास्तव
25/01/2025

No comments:

Post a Comment

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...